रामगढ़: NGT के प्रतिबंध के बावजूद दामोदर नदी से बालू उठाव जारी, पर्यावरण पर बढ़ा संकट

झारखंड के रामगढ़ जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। मानसून के सीजन को देखते हुए एनजीटी ने नदी से बालू निकालने और उसके परिवहन पर पूरी तरह रोक लगाई है, लेकिन इसके बावजूद पतरातू अंचल क्षेत्र में दामोदर नदी के अलग-अलग घाटों से धड़ल्ले से बालू का अवैध खनन और उठाव किया जा रहा है। इस निरंतर हो रहे दोहन के चलते नदी के अस्तित्व और उसके प्राकृतिक स्वरूप पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।
सुबह से शाम तक चल रही ट्रैक्टरों की आवाजाही
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, पतरातू के कई चिन्हित बालू घाटों पर सुबह की पहली किरण से लेकर देर शाम तक ट्रैक्टरों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। माफियाओं द्वारा नदी के बीच धारा और किनारों से अवैध रूप से बालू निकाला जा रहा है। इस बालू को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए ढोकर सुरक्षित व गुप्त ठिकानों पर जमा (स्टॉक) किया जा रहा है, ताकि आने वाले दिनों में इसे ऊंचे दामों पर चोरी-छिपे बेचा जा सके।
एनजीटी के आदेशों की अनदेखी, पर्यावरण पर खतरा
इलाके के लोगों का कहना है कि प्रशासन और पर्यावरण नियमों की आंखों में धूल झोंककर यह काला कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। जानकारों और पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो बारिश के दिनों में इस तरह अनियंत्रित तरीके से बालू उठाने से नदी की जल भंडारण क्षमता पर बेहद बुरा असर पड़ता है। इसके कारण बड़े पैमाने पर भू-कटाव (मिट्टी का कटना) शुरू हो जाता है और जलीय जीवों का जीवन भी खतरे में पड़ जाता है। घाटों पर खड़ी गाड़ियों को देखकर साफ पता चलता है कि यह काम किसी बड़े सिंडिकेट के इशारे पर हो रहा है, जिससे स्थानीय तंत्र की मुस्तैदी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग
दामोदर नदी को बचाने के लिए अब क्षेत्र के जागरूक ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। उन्होंने जिला प्रशासन, रामगढ़ और खनन विभाग के आला अधिकारियों से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और अवैध बालू घाटों पर छापेमारी कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस अवैध धंधे को तुरंत नहीं रोका गया, तो क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। हालांकि, इस पूरे मामले पर प्रशासनिक महकमे की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है।


