रेगुलराइजेशन स्कीम के 4542 आवेदन अटके, पोर्टल शुरू नहीं होने से नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया ठप

झारखंड सरकार द्वारा अनधिकृत इमारतों को वैध बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई रेगुलराइजेशन योजना के तहत राज्यभर से कुल 4,542 भवन मालिकों ने आवेदन जमा किए हैं। हालांकि, आवेदन की समय-सीमा समाप्त हुए लगभग एक महीना बीत जाने के बाद भी नक्शा पास करने का काम शुरू नहीं हो सका है। इमारतों के नियमितीकरण के लिए बनाए जाने वाले समर्पित ऑनलाइन पोर्टल के चालू न होने की वजह से सभी फाइलें लटकी पड़ी हैं, जिससे आवेदक आगे की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
योजना में जटिल नियमों की पेचीदगी बनी बड़ी बाधा
इस योजना में शामिल कुछ कठिन नियमों व शर्तों के कारण उम्मीद के मुताबिक आवेदन प्राप्त नहीं हो सके। नियम के अनुसार, केवल वही इमारतें इस योजना का लाभ ले सकती हैं जो अधिकतम 300 वर्गमीटर प्लॉट पर बनी हों और जी प्लस टू (G+2) तक ही हों। यदि जमीन का क्षेत्रफल इससे अधिक है, भले ही उस पर निर्माण कम ही क्यों न हुआ हो, उसे योजना से बाहर रखा गया है। इसके अतिरिक्त, सड़क की चौड़ाई के साथ-साथ आगे, पीछे और किनारों (सेटबैक) की जगह का पूरा विवरण देना अनिवार्य किया गया है। कई भवन निर्माताओं को यह डर सता रहा है कि भविष्य में रास्ता चौड़ा होने पर उनके निर्माण को नुकसान पहुंच सकता है, जिस वजह से काफी लोगों ने आवेदन ही नहीं किया।
दिसंबर 2026 तक अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव
कम संख्या में आवेदन प्राप्त होने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस योजना की मियाद को दिसंबर 2026 तक विस्तारित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अब तक राज्य सरकार की अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है। मंजूरी न मिल पाने के चलते न तो ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत हो पाई है और न ही प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी, आपत्तियों के समाधान या नक्शा अप्रूवल की कार्रवाई आगे बढ़ सकी है। संबंधित अधिकारी शासन के अगले आदेश की प्रतीक्षा में हैं।
पोर्टल शुरू होने के बाद ही होगी कार्रवाई
स्थानीय नगर निकायों का स्पष्ट कहना है कि नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन मोड में ही संचालित की जानी है। जब तक पोर्टल एक्टिव नहीं होता, तब तक किसी भी आवेदन को आगे बढ़ा पाना संभव नहीं है। आवेदनों की बारीकी से जांच, कागजातों का भौतिक सत्यापन, आम लोगों की आपत्तियों का निस्तारण और अंतिम नक्शा स्वीकृति, ये सभी चरण ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ही पूरे किए जाएंगे। फिलहाल पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी है।
जागरूकता अभियान भी नहीं आया काम
योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (RRDA) की ओर से रिंग रोड तथा आसपास के इलाकों में दो लाख से अधिक पर्चे बांटे गए थे, लेकिन इसके बावजूद उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिल सके।
