CISF का बड़ा प्रशासनिक बदलाव: रांची बना देश के कोल सेक्टर का केंद्रीय कमान सेंटर, ड्रोन से होगी सुरक्षा

देश के रणनीतिक और बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (Critical Infrastructure) की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक तथा मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने अपनी कार्यप्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद, आगामी 1 नवंबर 2026 से CISF का यह नया कार्यात्मक ढांचा (Functional Structure) पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत पारंपरिक भौगोलिक या क्षेत्रीय सीमाओं के बजाय ‘सेक्टर-आधारित डोमेन विशेषज्ञता’ को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। इस बड़े बदलाव के अंतर्गत झारखंड की राजधानी रांची को देश के पूरे कोयला सेक्टर (Coal Sector) की सुरक्षा का केंद्रीय कमान सेंटर (Command Center) बनाया गया है।

पारंपरिक सीमाओं से हटकर सेक्टर-आधारित विशेषज्ञता पर जोर
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने पिछले 25 वर्षों में विमानन (Aviation) और परमाणु ऊर्जा-अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विशेष कमांड के सफल अनुभवों को देखते हुए यह बड़ा कदम उठाया है। बल का मानना है कि देश के प्रत्येक उद्योग—चाहे वह ऊर्जा हो, कोयला हो या इस्पात—की अपनी अलग कार्यप्रणाली, संभावित खतरे और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां होती हैं। इसलिए, अब भौगोलिक सीमाओं की जगह विभिन्न उद्योगों के आधार पर विशेष यूनिट्स का गठन किया गया है, ताकि विशिष्ट खतरों का सामना करने के लिए आधुनिक और पेशेवर रणनीतियां तैयार की जा सकें।

रांची को मिली कोल सेक्टर की कमान
इस बड़े पुनर्गठन के तहत झारखंड की राजधानी रांची में स्थित सीआईएसएफ के पूर्वी सेक्टर मुख्यालय को अब आधिकारिक रूप से ‘कोल सेक्टर, रांची’ (Coal Sector, Ranchi) में परिवर्तित कर दिया गया है। 1 नवंबर से देश भर में फैली सभी प्रमुख कोयला खदानों और कोल यूनिट्स की सुरक्षा की बागडोर इसी केंद्रीय कमांड सेंटर के अधीन होगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य देश के ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित करना, सुरक्षा प्रक्रियाओं में एकरूपता लाना और अवैध खनन या अन्य सुरक्षा चूकों पर पूरी तरह से रोक लगाना है।
ड्रोन और आधुनिक तकनीक से लैस होगी सुरक्षा व्यवस्था
बदलते दौर के साथ सुरक्षा चुनौतियों के स्वरूप में भी बदलाव आया है। पारंपरिक सुरक्षा के साथ-साथ अब साइबर सुरक्षा और ड्रोन या मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) से जुड़े खतरों से निपटना भी बेहद जरूरी हो गया है। इसे ध्यान में रखते हुए, सीआईएसएफ ने शीर्ष संस्थानों के साथ मिलकर अपने जवानों को आधुनिक तकनीकों, ड्रोन डिटेक्शन और एंटी-ड्रोन गतिविधियों में विशेष प्रशिक्षण देना शुरू किया है। आने वाले समय में देश के इन संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की निगरानी में अत्याधुनिक ड्रोन और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम का व्यापक उपयोग किया जाएगा।

