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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

खरसावां के टुनियाबाड़ी में गहराया पेयजल समस्या, चुआं और कुएं के सहारे ग्रामीण 

सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड के अंतर्गत आने वाले टुनियाबाड़ी (बाबूसाई टोला) में पीने के पानी की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ गर्मी का प्रकोप बढ़ते ही जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। स्थिति यह है कि गांव में लगे सभी 10 चापाकल और दोनों जल मीनारें खराब पड़ी हुई हैं। पानी के लिए हाहाकार मचने के कारण हर दिन सुबह से ही चापाकलों और पुराने जलस्रोतों पर महिलाओं की लंबी कतारें लग रही हैं।

प्रशासनिक स्तर पर भले ही क्षेत्र में जलापूर्ति सुचारू होने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल की हकीकत इससे बिल्कुल जुदा है। सरकारी आंकड़ों और जल जीवन मिशन के पोर्टल के मुताबिक टुनियाबाड़ी के कुल 140 परिवारों में से 95 को नल का कनेक्शन दिया जा चुका है, जबकि 45 परिवारों तक कनेक्शन पहुंचना बाकी है। लगभग 700 की आबादी वाले इस टोले में सभी जाति वर्ग के लोग रहते हैं, जो वर्तमान में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

सरकारी चापाकल और जल मीनार खराब

तीखे तेवरों वाली धूप और गर्मी की वजह से एक तरफ जहाँ पानी की मांग और खपत में भारी इजाफा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ जल बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। टुनियाबाड़ी में पूर्व में स्थापित किए गए सभी 10 चापाकल वर्तमान में ठप पड़े हैं। इसके अलावा सौर ऊर्जा (सोलर) से संचालित होने वाली दो मिनी जल मीनारें भी तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं। इस वजह से ग्रामीणों को हर सुबह पानी की व्यवस्था करने के लिए कड़ी मशक्कत और संघर्ष करना पड़ रहा है।

चुआं और कुंआ के पानी से बुझ रही है ग्रामीणों की प्यास

पेयजल के गंभीर संकट के कारण टुनियाबाड़ी (बाबूसाई टोला) के निवासियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए रोज जंग लड़नी पड़ रही है। शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था न होने के कारण गांव की महिलाएं नदी के किनारे बने चुआं (मिट्टी का छोटा गड्ढा) या फिर गांव के पुराने कुएं से दूषित या अनफ़िल्टर्ड पानी लाने को विवश हैं। रोजाना सुबह से ही महिलाएं हाथों में बाल्टी और डिग्ची लेकर पानी की तलाश में मीलों भटकती देखी जा सकती हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर जिले के संबंधित सरकारी अधिकारियों तक इस समस्या की लिखित और मौखिक शिकायत की है। कई बार चापाकलों और खराब पड़ी जलापूर्ति प्रणालियों की मरम्मत कराने की गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक शासन-प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

ग्रामीणों ने खराब चापाकल और जल मीनारों का दुरुस्त करने की मांग की

टुनियाबाड़ी के आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द खराब पड़े सोलर संचालित मिनी जल मीनारों और चापाकलों को ठीक करने की पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस जल संकट को दूर नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो जाएगी और ग्रामीणों की मुसीबतें दोगुनी हो जाएंगी।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील करने वालों में श्रीनिवास राय, रमाकांत राय, धृवशंकर राय, रंजीत राय, गणेश सिंहदेव, राघो गुंदुवा, लालबाबू स्वांसी, बासंती नायक, मानी नायक, मोहनी गोप, सेफाली बेहरा, निर्मला सोय, पायल उमंग, शिवांदी बेहरा, रुपाली बेहरा और सत्यनारायण राय सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हैं।

पुरानी जलापूर्ति योजना से घरों तक नहीं पहुंचता है पानी

गांव की इस बदहाली का एक बड़ा कारण यह भी है कि टुनियाबाड़ी बस्ती के लोग पिछले एक दशक से ‘खरसावां जलापूर्ति योजना’ के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2005-06 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए शुरुआती दौर में गांव के करीब चार दर्जन (48) घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से सुचारू रूप से पानी पहुंचाया जा रहा था। हालांकि, कुछ वर्षों तक ठीक से काम करने के बाद नियमित साफ-सफाई और मेंटेनेंस (रखरखाव) न होने की वजह से मुख्य पाइपलाइन पूरी तरह जाम हो गई। प्रशासनिक उदासीनता के कारण पिछले 10 सालों से इस पाइपलाइन के जरिए घरों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची है।

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