अलनीनो का असर: झारखंड में 50% कम बारिश, खेती पर छाया संकट

अलनीनो के प्रभाव से झारखंड में बारिश की भारी कमी, कृषि व्यवस्था संकट में
झारखंड में इस साल अलनीनो (El Nino) का प्रतिकूल प्रभाव तेजी से गहराने लगा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मॉनसून की रफ्तार काफी धीमी है। जहां बीते साल इस अवधि तक राज्य में लगभग 417 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी थी, वहीं इस साल अब तक केवल 129 मिमी बारिश ही हो पाई है। बारिश का यह स्तर सामान्य से तकरीबन 50 फीसदी कम है। पानी की इस भारी किल्लत का सीधा असर न केवल जलाशयों के जलस्तर पर पड़ रहा है, बल्कि खरीफ फसलों की बुआई और रोपाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। पिछले साल इस समय तक राज्य के करीब 31 प्रतिशत खेतों में धान की रोपाई संपन्न हो चुकी थी, लेकिन इस वर्ष अधिकांश जिलों में काम अभी शुरू भी नहीं हो सका है। कृषि मंत्री द्वारा हर दो हफ्ते में खरीफ सीजन के हालातों की समीक्षा की जा रही है।
रांची में 205, गढ़वा जिले में सिर्फ 18 मिमी बारिश
अगर जिलों के स्तर पर देखें, तो पिछले साल जुलाई के शुरुआती हफ्ते तक रांची और पश्चिमी सिंहभूम जैसे क्षेत्रों में 600 मिमी से भी ज्यादा पानी बरस चुका था। इसके विपरीत, इस साल रांची में महज 205 मिमी और पश्चिमी सिंहभूम में सिर्फ 136 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। सबसे चिंताजनक स्थिति गढ़वा जिले की है, जहां अब तक नाममात्र की यानी केवल 18 मिमी बारिश हुई है। इस सीजन में राज्य के किसी भी हिस्से में सामान्य वर्षा देखने को नहीं मिली है और कमोबेश सभी जिलों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
झारखंड में बारिश की कमी से धान की रोपाई हुई कम
बीते वर्ष 2025 में जुलाई के पहले सप्ताह तक किसानों ने लगभग 95 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल लगा दी थी। मगर इस बार स्थिति पूरी तरह उलट है और अधिकतर जिलों में धान की रोपाई का काम ठप पड़ा है। अब तक राज्य में कुल मिलाकर केवल 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान लगाया जा सका है, जो मुख्य रूप से संताल परगना के इलाकों में हुआ है। कृषि विभाग के पुराने आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में 70 हजार हेक्टेयर और कोल्हान क्षेत्र में करीब 14 हजार हेक्टेयर में रोपाई पूरी हो चुकी थी।
क्या कहना है मंत्री का?
सूबे की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इस परिस्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अलनीनो के असर के कारण राज्य में सामान्य से करीब आधी ही बारिश हुई है, जो कि बेहद गंभीर विषय है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार ने समय रहते तमाम जरूरी तैयारियां कर ली हैं और पूरे हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि झारखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने भविष्य में सूखे (Drought) की आशंका को भांपते हुए सबसे पहले अपनी आकस्मिक योजना (Contingency Plan) तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दी है।
