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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

जेटेट नियमावली पर कैबिनेट में फैसला टला, मिथिलेश ठाकुर ने बताया ‘शुभ समाचार’ तो भानु शाही बोले- युवाओं की जीत

सियासी घमासान और कड़ा विरोध झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की आगामी नियमावली को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। बुधवार को संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में इस नई नियमावली के मौजूदा स्वरूप पर मंत्रियों के बीच तीखा विरोध देखने को मिला, जिसके चलते फिलहाल इसे मंजूरी नहीं मिल पाई। विवाद की मुख्य वजह भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से बाहर रखना बताया जा रहा है। बैठक के दौरान वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और पलामू प्रमंडल में इन भाषाओं को शामिल करने की मांग की। मंत्रियों के सख्त रुख के बाद सरकार ने इस विषय पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है।

श्रेय लेने की मची होड़ कैबिनेट में फैसला टलने की खबर आते ही गढ़वा और पलामू प्रमंडल की राजनीति में इसका श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश ठाकुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसे पलामू के छात्रों के लिए ‘शुभ समाचार’ बताया। उन्होंने लिखा कि अब क्षेत्र के युवाओं को भाषा के आधार पर नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। वहीं, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने इसे युवाओं की जीत करार देते हुए कहा कि यह पलामू के 50 लाख भाषियों के संघर्ष का परिणाम है।

विधायकों ने पहले ही दी थी चेतावनी इस संवेदनशील मुद्दे पर भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी और भानु प्रताप शाही ने पहले ही मोर्चा खोल रखा था। विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने तो यहां तक चेतावनी दी थी कि यदि इन भाषाओं के साथ भेदभाव हुआ, तो वे सत्ताधारी गठबंधन (झामुमो, कांग्रेस, राजद) के नेताओं का पलामू प्रमंडल में प्रवेश वर्जित कर देंगे। विपक्षी नेताओं के इस कड़े रुख ने सरकार पर दबाव बढ़ाने का काम किया।

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