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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

पीएम मोदी का इजरायल दौरा: आयरन बीम से ‘सुदर्शन चक्र’ होगा और भी घातक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से इजरायल के दो दिवसीय ऐतिहासिक दौरे पर हैं. इस यात्रा को भारत और इजरायल के बीच रक्षा, व्यापार और टेक्नोलॉजी के रिश्तों को नए लेवल पर ले जाने के मौके के रूप में देखा जा रहा है. अक्टूबर 2023 में गाजा संघर्ष शुरू होने के बाद से इजरायल के कई पुराने साथियों से रिश्ते तनावपूर्ण हुए हैं, ऐसे में भारत का यह साथ इजरायल के लिए बहुत बड़ी डिप्लोमैटिक जीत माना जा रहा है.

दोनों देशों की ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ बहुत मजबूत हुई

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पिछले कुछ सालों में दोनों देशों की ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ बहुत मजबूत हुई है. वहीं, इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने मोदी को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि हम इनोवेशन और सुरक्षा के पार्टनर हैं. खास बात यह रही कि डिनर के दौरान नेतन्याहू ने ‘मोदी जैकेट’ पहनकर सबको चौंका दिया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं.

भारत का ‘सुदर्शन चक्र’ प्लान

भारत अपनी एयर डिफेंस प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) को पूरी तरह बदल रहा है. पुराने जमाने में हम सिर्फ खास जगहों को बचाते थे, लेकिन अब भारत ‘सुदर्शन चक्र’ नाम का एक ऐसा सुरक्षा कवच बना रहा है जो पूरे आसमान को कवर करेगा. इसमें कई लेयर्स होंगी:

  • सबसे बाहरी लेयर: यहां रूस से आई S-400 मिसाइलें तैनात हैं. 2018 की डील के मुताबिक तीन रेजिमेंट आ चुकी हैं और बाकी दो 2026 तक फिट हो जाएंगी. इसके साथ ही भारत खुद का ‘प्रोजेक्ट कुशा’ भी बना रहा है.
  • मीडियम लेयर: इसमें भारत और इजरायल द्वारा मिलकर बनाया गया Barak-8 (MR-SAM) सिस्टम है, जो दुश्मन के एयरक्राफ्ट और मिसाइलों को दूर ही ढेर कर देता है.
  • शॉर्ट रेंज लेयर: बॉर्डर के पास की सुरक्षा के लिए आकाश-एनजी (Akash-NG) और QRSAM जैसे सिस्टम तैनात हैं.
  • नजदीकी सुरक्षा: ड्रोन और हेलीकॉप्टर को गिराने के लिए कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली मिसाइलें इस्तेमाल होती हैं.

क्या है ‘आयरन बीम’ और यह गेम-चेंजर क्यों है?

आजकल दुश्मन सस्ते ड्रोन और रॉकेट से हमला करते हैं. उन्हें गिराने के लिए भारत की महंगी मिसाइलें खर्च करना घाटे का सौदा है. इसीलिए भारत इजरायल की ‘आयरन बीम’ टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी ले रहा है.

  • कैसे काम करती है: यह लेजर वाली ‘टॉर्च’ जैसी है. इसकी तेज रोशनी (Fibre Lasers) दुश्मन के ड्रोन या रॉकेट पर कुछ सेकंड के लिए पड़ती है और उसे जलाकर राख कर देती है.
  • सस्ता जुगाड़: जहां एक मिसाइल लाखों-करोड़ों की आती है, वहीं लेजर से एक हमला करने का खर्च सिर्फ 3 से 5 डॉलर (लगभग 250 से 400 रुपये) आता है. अगर मेंटेनेंस भी जोड़ लें, तो भी यह खर्च करीब 2,000 डॉलर तक ही रहता है.
  • कमी: धुंध, बारिश या धूल भरी आंधी में लेजर की ताकत कम हो जाती है, इसलिए इसे मिसाइल सिस्टम के साथ मिलकर चलाया जाएगा.

भारत के ‘दुर्गा-2’ (DURGA-II) को मिलेगा बूस्ट

भारत खुद का लेजर हथियार DURGA-II बना रहा है. इजरायल के साथ हाथ मिलाने से भारत को लेजर की सटीकता और कंट्रोल करने वाली एडवांस टेक्नोलॉजी मिल जाएगी. इससे भारत को भविष्य में हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

सिर्फ हथियार नहीं, बिजनेस भी है साथ-साथ

भारत और इजरायल अब सिर्फ खरीदार और दुकानदार नहीं रहे, बल्कि मिलकर हथियार बना रहे हैं.

  • अडाणी-एल्बिट: हैदराबाद में ड्रोन बना रहे हैं जो विदेशों में भी बेचे जाएंगे.
  • कल्याणी रफाल: भारत में ही मिसाइल सिस्टम के पार्ट्स बना रहे हैं.
  • दोनों देश फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर भी बात कर रहे हैं जिससे व्यापार को नई ऊंचाइयां मिलेंगी.

इजरायली संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय PM

पीएम मोदी इजरायली संसद ‘नेसेट’ (Knesset) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं. उन्हें वहां का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ भी दिया गया. मोदी ने साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की पॉलिसी ‘जीरो टॉलरेंस’ की है और 7 अक्टूबर के हमले का कोई बचाव नहीं हो सकता. साथ ही उन्होंने शांति की भी अपील की.

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