सरस्वती विद्या मंदिर, सरायकेला में ‘संकुल स्तरीय विज्ञान आचार्य कार्यशाला’ का सफ़ल आयोजन

सरायकेला, 30 सितंबर, 2026
बुधवार(भाग्य सागर)
सरस्वती विद्या मंदिर सरायकेला में आज ‘संकुल स्तरीय विज्ञान आचार्य कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, प्रयोगात्मक, रुचिकर एवं नवाचारपूर्ण बनाने के साथ-साथ भैया-बहनों के सर्वांगीण विकास में आचार्यों की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाना रहा।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि, डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, प्रदेश मंत्री, विद्याविकास समिति, झारखंड एवं विभागाध्यक्ष, भौतिकी विभाग, डोरंडा कॉलेज, राँची उपस्थित रहे। उनके साथ दिलीप गुप्ता, प्रांतीय समिति के सदस्य, क्षेत्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, चाईबासा प्रबंधकारिणी समिति के कोषाध्यक्ष तथा प्रियंका गुप्ता, राष्ट्रीय सेविका समिति की जिला संयोजिका उपस्थित रहीं।

प्रधानाचार्य पार्थ सारथी आचार्य ने सर्वप्रथम सभी अतिथियों का विद्यालय परिवार से परिचय करवाया तथा उनका स्वागत किया। इस अवसर पर जमशेदपुर विभाग प्रमुख तुलसी प्रसाद ठाकुर का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ।
मुख्य अतिथि डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह ने
कार्यशाला को संबोधित करते हुए
विज्ञान शिक्षा के महत्व के साथ भैया-बहनों के जीवन, व्यक्तित्व एवं सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना या विषयगत ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि भैया-बहनों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, आत्मविश्वास, अनुशासन एवं जीवन-मूल्यों का विकास करना भी है। उन्होंने विज्ञान को दैनिक जीवन से जोड़कर समझाने तथा प्रयोगों एवं गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने आचार्यों के साथ संवाद करते हुए विद्यालयी शिक्षा, भैया-बहनों की आवश्यकताओं, उनके विकास एवं उनके भीतर छिपी प्रतिभाओं को पहचानने जैसे अनेक विषयों पर चर्चा की। कार्यशाला केवल एक तरफा संबोधन तक सीमित नहीं रही, बल्कि आचार्य एवं दीदी के साथ प्रत्यक्ष संवाद एवं प्रश्नोत्तर का भी आयोजन हुआ। उपस्थित आचार्यों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे गए, उनके विचार एवं अनुभव जाने गए तथा उनके प्रश्नों और जिज्ञासाओं का मुख्य अतिथि द्वारा विस्तारपूर्वक उत्तर दिया गया। विद्यालय के भैया-बहनों के शैक्षणिक एवं सर्वांगीण विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। आचार्यों की भूमिका, विद्यार्थियों की जिज्ञासा को बढ़ावा देने, उनकी प्रतिभा को पहचानने तथा उन्हें बेहतर सीखने का वातावरण प्रदान करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
दिलीप गुप्ता ने भी अपने अनुभव एवं विचार साझा करते हुए विद्यालयी शिक्षा तथा संगठनात्मक दृष्टि से आचार्यों की भूमिका के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रियंका गुप्ता की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
कार्यशाला में संकुल के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों से आए विज्ञान आचार्य एवं भगिनी सम्मिलित हुए। सभी ने विज्ञान शिक्षण से संबंधित अपने अनुभव साझा किए तथा शिक्षण के दौरान आने वाली चुनौतियों, उनके समाधान एवं नवीन गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान को भैया-बहनों के लिए अधिक रुचिकर बनाने के उपायों पर सार्थक चर्चा की।

