अंबेडकर जयंती पर कस्तूरबा विद्यालय में संविधान की चेतना से सशक्त बेटियां कार्यक्रम का आयोजन

अंबेडकर जयंती: कस्तूरबा विद्यालय में छात्राओं को दी गई कानूनी अधिकारों की जानकारी
झारखंड के जगन्नाथपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर एक विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) चाईबासा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को उनके संवैधानिक अधिकारों और देश की न्यायिक व्यवस्था के प्रति जागरूक करना था।

डालसा के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष के दिशा-निर्देशों और डालसा सचिव के नेतृत्व में किया गया। इस विधिक जागरूकता अभियान को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है, जहाँ बालिकाओं को बताया गया कि किस प्रकार देश का कानून और संविधान उनकी सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है।
डॉ. अंबेडकर के आदर्शों और संविधान पर चर्चा
शिविर के दौरान विद्यालय की शिक्षिकाओं ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रेरक जीवन और उनके कड़े संघर्षों पर प्रकाश डाला। छात्राओं को बताया गया कि भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहेब की भूमिका अद्वितीय थी। उन्होंने एक ऐसे राष्ट्र की नींव रखी जहाँ समानता, न्याय और स्वतंत्रता हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
छात्राओं को मिले कानूनी अधिकारों के गुर
पारा लीगल वॉलंटियर उमर सादिक ने बहुत ही सरल शब्दों में छात्राओं को डालसा की कार्यप्रणाली के बारे में समझाया। उन्होंने छात्राओं को गिरफ्तारी से जुड़े उनके मौलिक अधिकारों की जानकारी दी, जैसे:
- गिरफ्तारी का कारण पूछने का अधिकार।
- अपने वकील या परिजनों को सूचना देने का अधिकार।
- न्यायिक हिरासत से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष कानून
कार्यक्रम में छात्राओं को विशेष रूप से महिलाओं से संबंधित सुरक्षा कानूनों के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि सूर्यास्त के बाद महिलाओं की गिरफ्तारी से जुड़े विशेष सुरक्षा प्रावधान क्या हैं। इस जानकारी का उद्देश्य छात्राओं के भीतर आत्मविश्वास पैदा करना था ताकि वे भविष्य में किसी भी स्थिति का मजबूती से सामना कर सकें।
छात्राओं की सक्रिय भागीदारी और उत्साह
इस विधिक शिविर में छात्राओं ने न केवल ध्यान से बातें सुनीं, बल्कि सवाल-जवाब सत्र में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने संविधान और अपने अधिकारों से जुड़े कई जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा संतोषजनक समाधान किया गया। शिक्षकों और कर्मियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया।
जागरूकता के माध्यम से सशक्तिकरण
आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के विधिक शिविर विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की बालिकाओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। जब बेटियां अपने अधिकारों के प्रति सजग और शिक्षित होंगी, तभी एक सुरक्षित और सशक्त समाज का निर्माण संभव हो पाएगा।
