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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

घाटशिला : दामपाड़ा के काडाडूबा तालाब के जीर्णोद्धार की तैयारी, विभाग बना रहा डीपीआर

Ghatsila News: पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला प्रखंड अंतर्गत दामपाड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए एक अच्छी खबर है. क्षेत्र के ऐतिहासिक और करीब 15 दशक (150 वर्ष) पुराने काडाडूबा तालाब के पुनरुद्धार की दिशा में प्रशासनिक कवायद शुरू हो गई है. लगभग 12 एकड़ के विशाल भूभाग में फैले इस जलाशय के जीर्णोद्धार को लेकर स्थानीय ग्रामीण पिछले दो दशकों से लगातार मांग कर रहे थे, जिस पर अब जल संसाधन विभाग ने संज्ञान लेते हुए आगे की कार्रवाई तेज कर दी है. विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया है और इसके कायाकल्प के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाने का काम शुरू कर दिया है.

तालाब के जीर्णोद्धार के लिए बन रहा डीपीआर

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस जलाशय के आसपास स्थित काडाडूबा, लेदा और बांधडीह समेत कई अन्य गांवों के किसान बड़े पैमाने पर खेती-किसानी से जुड़े हैं. ग्रामीणों ने पूर्व में ग्रामसभा का आयोजन कर इस तालाब के जीर्णोद्धार से जुड़ा एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया था. इसके बाद जल उपभोक्ता समिति और ग्रामसभा की अनुशंसा के साथ लघु सिंचाई प्रमंडल (जल संसाधन विभाग), जमशेदपुर को एक आधिकारिक मांग पत्र सौंपा गया.

इस जनहित की मांग पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभाग के सहायक अभियंता पंकज कुमार और कनीय अभियंता सूरज सुंडी ने प्रभावित स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मामले की जानकारी देते हुए कनीय अभियंता सूरज सुंडी ने बताया कि ग्रामसभा और जल उपभोक्ता समिति से मिले आवेदन के आधार पर विभागीय जांच की गई है. तालाब की उपयोगिता को देखते हुए इसके कायाकल्प के लिए फिलहाल डीपीआर (DPR) तैयार किया जा रहा है.

250 एकड़ तक कृषि भूमि को मिलेगा सिंचाई लाभ

स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि यह प्राचीन तालाब पूरे दामपाड़ा क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. इस तालाब में संचित होने वाले जल स्रोत से लगभग 200 से लेकर 250 एकड़ तक की कृषि योग्य भूमि की सिंचाई की जाती है. तालाब का जीर्णोद्धार होने से न सिर्फ खरीफ और रबी फसलों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन (Farming of Fish) को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

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